June 17, 2026 12:38 am

SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 13.83 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी/एसटी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 13.83 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत ईडी के देहरादून सब-जोनल कार्यालय द्वारा की गई है।

यह धनराशि उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए जारी की गई छात्रवृत्ति से जुड़ी बताई गई है।

2020 से चल रही है जांच

उत्तराखंड में एससी/एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच वर्ष 2020 से जारी है। अब तक ईडी इस मामले में स्पेशल PMLA कोर्ट, देहरादून में पांच अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaint) दाखिल कर चुकी है तथा पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किए जा चुके हैं।

निजी शिक्षण संस्थानों पर फर्जीवाड़े का आरोप

ईडी की जांच में सामने आया कि कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी और अयोग्य छात्रों को लाभार्थी दिखाकर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हासिल की। जांच के दायरे में मुख्य रूप से:

  • मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, रुड़की
  • रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज/मेडिकल साइंसेज (RIMS), हरिद्वार
  • महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेरठ (उत्तर प्रदेश)

शामिल हैं।

27.98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरण की जांच

ईडी के अनुसार जांच अवधि में:

  • 6,208 छात्रवृत्ति दावों को जिला समाज कल्याण अधिकारी, हरिद्वार द्वारा प्रोसेस किया गया।
  • लगभग 98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई।
  • इनमें से 74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के बैंक खातों में जमा हुए।
  • जबकि 24 करोड़ रुपये छात्रों के नाम पर खोले गए खातों में भेजे गए।

2,895 दावे फर्जी पाए गए

जांच में सामने आया कि:

  • 2,895 छात्रवृत्ति दावे फर्जी थे।
  • 668 अनुपस्थित छात्रों को करीब 85 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
  • 84 असफल या परीक्षा फॉर्म नहीं भरने वाले छात्रों के नाम पर 65 लाख रुपये जारी किए गए।
  • 1,662 विश्वविद्यालय में पंजीकृत नहीं छात्रों को 34 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दिखाई गई।
  • 47 गैर-संबद्ध (Non-affiliated) पाठ्यक्रमों के छात्रों को 75 लाख रुपये दिए गए।
  • 434 डुप्लीकेट या रिकॉर्ड में मौजूद नहीं छात्रों के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपये जारी किए गए।

कॉलेज प्रबंधन के नियंत्रण में थे छात्रों के खाते

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि कई छात्रों के बैंक खाते वास्तव में कॉलेज प्रबंधन और कर्मचारियों के नियंत्रण में संचालित किए जा रहे थे। कई खातों में कॉलेज कर्मचारियों के मोबाइल नंबर दर्ज थे और प्रवेश एवं बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बिचौलियों का इस्तेमाल किया गया।

इन खातों में छात्रवृत्ति की राशि जमा होने के बाद पैसा वापस संस्थानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था।

मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए खरीदी गई संपत्तियां

जांच के अनुसार छात्रवृत्ति की राशि को विभिन्न ट्रस्टों, सोसायटियों और संबद्ध संस्थाओं के खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। बाद में इसी धन का उपयोग संपत्तियां खरीदने, संस्थानों के संचालन और अन्य खर्चों में किया गया।

हरिद्वार और रुड़की की संपत्तियां अटैच

ईडी द्वारा जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत लगभग 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फिक्स्ड डिपॉजिट खाते
  • हरिद्वार और रुड़की स्थित जमीनें
  • शिक्षण एवं संस्थागत भवन

ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

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