July 26, 2026 5:55 am

वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग पर हरीश रावत ने निकाली पदयात्रा…

रामनगर: वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने और ग्रामीणों को भूमि का मालिकाना अधिकार देने की मांग को लेकर रामनगर में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में बड़ी पदयात्रा निकाली गई। “जल, जंगल, जमीन हमारी” के नारों के साथ निकली इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

पदयात्रा में रामनगर खंड प्रमुख मंजू नेगी, ज्येष्ठ खंड प्रमुख संजय नेगी, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री पुष्कर दुर्गापाल सहित कई गांवों से आए दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “धामी सरकार होश में आओ” और “वन ग्रामों को मालिकाना अधिकार दो” जैसे नारे लगाए।

यह पदयात्रा रामनगर नगर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी और अंत में उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।

इस अवसर पर हरीश रावत ने कहा कि सरकार गरीबों की जमीनों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा पीड़ितों और भूमिहीन लोगों को जमीन देने के बजाय उनकी जमीनों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले मालधन, बिंदुखत्ता और रामनगर के पुछड़ी जैसे क्षेत्रों में गांव बसाने की सोच थी, जिसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि उत्तराखंड के अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है। इसी भावना के साथ वह रामनगर पहुंचे हैं और वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ खड़े हैं।

हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार के समय वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि छब्बीस दिसम्बर को मंत्रिमंडल में प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें कई गांवों को भूमि का मालिकाना अधिकार देने की बात कही गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया गया और इसे अलग रख दिया गया। उन्होंने कहा कि जब तक वन ग्रामों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

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