June 9, 2026 11:34 pm

दुनियाभर में गूंज रहा हरिद्वार कुंभ, जापान के संतों ने देखीं तैयारियां, बोले- बड़ी संख्या में आएंगे श्रद्धालु

हरिद्वार। वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ मेले की तैयारियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आकर्षण का केंद्र बनती जा रही हैं। कुंभ मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे जापान के संतों और साध्वियों ने निर्माण कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि अगले वर्ष बड़ी संख्या में जापानी श्रद्धालु और आध्यात्मिक साधक हरिद्वार पहुंचेंगे।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने साधु-संतों और मेला प्रशासन के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित गंगा घाटों एवं अन्य निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान जापान से आए संत भी मौजूद रहे और उन्होंने मेले की तैयारियों की जानकारी ली।

अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने संतों को बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर कुंभ मेले को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं। घाटों का विस्तार, सड़क संपर्क, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हरिद्वार में जिस स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं, वे अभूतपूर्व हैं। नए घाटों के निर्माण से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का वैश्विक उत्सव है और तैयारियां यह विश्वास दिलाती हैं कि आगामी कुंभ नए मानक स्थापित करेगा।

जापान के टोयामा प्रांत में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में जुटे संत आदित्यानंद गिरि ने कहा कि हरिद्वार में चल रही तैयारियां भारत की आध्यात्मिक विरासत के प्रति गंभीरता को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि जापान में भारतीय संस्कृति, योग और सनातन दर्शन के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है और उनके अनेक शिष्य भी आगामी कुंभ में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।

जापानी साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरि ने भी कुंभ को मानवता को जोड़ने वाला आध्यात्मिक महोत्सव बताया। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों का एकत्र होना विश्व बंधुत्व और आध्यात्मिक उन्नयन का प्रतीक है। उनके अनुसार कुंभ भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है, जो दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

हरिद्वार में 14 जनवरी से 20 अप्रैल 2027 तक आयोजित होने वाले कुंभ मेले को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच लगातार समन्वय बैठकों का दौर जारी है। सरकार का लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि यह महाआयोजन दिव्यता और भव्यता के नए आयाम स्थापित कर सके।

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