June 20, 2026 3:01 pm

उत्तराखंड: गुंडा एक्ट मामले में बिल्डर पुनीत अग्रवाल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, प्रशासनिक कार्रवाई पर नहीं लगी रोक

देहरादून। एटीएस सोसाइटी प्रकरण से जुड़े गुंडा एक्ट मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले संरक्षण आदेश की सीमा स्पष्ट करते हुए अहम टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि 2 मई 2026 को जारी किया गया “नो कोर्सिव एक्शन” आदेश आयुक्त के समक्ष लंबित अपील की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेगा और न ही प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई करने से रोकेगा।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से बताया गया कि जिला मजिस्ट्रेट देहरादून गुंडा एक्ट के तहत अंतिम आदेश पारित कर चुके हैं, जिसके खिलाफ पुनीत अग्रवाल ने आयुक्त के समक्ष अपील दायर की है। ऐसे में हाईकोर्ट का पूर्व संरक्षण आदेश अपीलीय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2 मई का संरक्षण आदेश केवल अपने सीमित दायरे में प्रभावी रहेगा। अदालत ने कहा कि आयुक्त अपील पर स्वतंत्र रूप से सुनवाई और निर्णय लेने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं तथा हाईकोर्ट का आदेश उनके अधिकार क्षेत्र में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षण आदेश को इस रूप में नहीं देखा जा सकता कि संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार कार्रवाई करने से वंचित हो जाएं। इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध पारित जिला बदर आदेश प्रभावी बना हुआ है।

सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि 27 मई 2026 के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के माध्यम से चुनौती दी गई है। 9 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित आदेश पर कोई स्थगन (स्टे) नहीं दिया है।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को यह आश्वासन भी दिया गया कि जिस दिन आयुक्त के समक्ष पुनीत अग्रवाल की अपील सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगी, उस दिन उनके खिलाफ कोई कोर्सिव कार्रवाई नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को अपने आदेश का हिस्सा बनाया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि पुनीत अग्रवाल को मिला संरक्षण पूर्ण या स्थायी नहीं है। हाईकोर्ट ने अपील की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करते हुए प्रशासनिक और वैधानिक कार्रवाई के सभी रास्ते खुले रखे हैं।

और पढ़ें

मतदान सर्वेक्षण

0
Default choosing

Did you like our plugin?

Poola Jada

और पढ़ें