August 27, 2026 10:20 am

शांतिकुंज के दधीचि अंगदान संकल्प अभियान में केंद्रीय मंत्री और सीएम धामी शामिल, सैकड़ों लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प

हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साधकों ने अंगदान के महत्व पर अपने विचार रखे, जबकि सैकड़ों लोगों ने मानव सेवा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है, जिससे गंभीर रूप से बीमार लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने कहा कि अंगदान को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से समझने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं और अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचे का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से अंगदान को देशव्यापी जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति त्याग, सेवा, समर्पण और परमार्थ की भावना पर आधारित है। महर्षि दधीचि और राजा शिवि के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद यदि किसी व्यक्ति का अंग किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है, तो इससे बड़ा पुण्य और मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। दून मेडिकल कॉलेज में राज्य का पहला सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही अंग प्रत्यारोपण केंद्र, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने गायत्री परिवार के एक शताब्दी से अधिक समय से आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संदेश हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” आज भी समाज को सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग और लोकमंगल की जीवनशैली है। समाज के कल्याण के लिए अपने समय, श्रम और संसाधनों का समर्पण ही यज्ञ की वास्तविक भावना है।

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, डॉ. अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डॉ. विजय धस्माना सहित कई विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प भी दिलाया।

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