July 27, 2026 10:13 am

रुद्रप्रयाग में 5 साल के बच्चे को उठा ले गया गुलदार, रात 11 बजे तक सर्च ऑपरेशन चलाकर ढूंढा गया शव…

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गुलदार का आतंक अब भयावह रूप ले चुका है. लगातार बढ़ रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. ताजा और दिल दहला देने वाली घटना रुद्रप्रयाग की ग्राम पंचायत सारी के सिन्द्रवाणी गांव से सामने आई है, जहां गुलदार ने 5 साल के मासूम बच्चे को अपना निवाला बना लिया.

इस घटना के बाद से पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है. मासूम के लापता होते ही परिजन बदहवास हालत में हैं. मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है. जिलाधिकारी प्रतीक जैन के निर्देशन एवं एसडीएम रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी के नेतृत्व में सिंद्रवाणी (छिनका नगरासू) में गुलदार द्वारा बच्चे को उठाकर ले जाने के मामले में 07 अलग अलग टीमों द्वारा गहन सर्च अभियान चलाया गया। जिसके चलते रात्रि लगभग 11 बजे बच्चे का शव बरामद कर लिया गया।

एसडीएम रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी ने बताया कि वन विभाग की 3 टीमें, डीडीआरएफ की 2 टीम, एसडीआरएफ की एक टीम एवं पुलिस तथा प्रशासन की टीम ने संयुक्त रूप से गहन सर्च अभियान चलाया गया और बच्चे का शव खोज लिया गया। उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “गुलदार के संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीणों की राय को शामिल करते हुए विभिन्न स्थानों पर पिंजरे लगाए जाएँगे एवं वन विभाग की गश्ती टीम लगातार गश्त करेगी।

डर के साए में गांव, बच्चों को घरों में कैद रहने को मजबूर: इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है. ग्रामीण अपने बच्चों को घरों से बाहर भेजने से डर रहे हैं. स्कूल जाना, खेतों में काम करना और शाम ढलते ही बाहर निकलना अब खतरे से खाली नहीं रहा. ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार आबादी क्षेत्र में बेखौफ घूम रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नजर आ रहे हैं.

वन विभाग पर गंभीर आरोप, नहीं चला त्वरित सर्च अभियान: ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग और प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी सर्च अभियान तत्काल शुरू नहीं किया गया. न तो प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम पहुंची, न ही पिंजरे लगाए गए और न ही ड्रोन या खोजी कुत्तों की मदद ली गई. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब जागेगा सिस्टम?

पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं, फिर भी सबक नहीं: यह पहली घटना नहीं है. रुद्रप्रयाग समेत आसपास के जिलों में पिछले कुछ महीनों में गुलदार के हमलों में कई मासूम, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके बावजूद न तो स्थायी समाधान निकाला गया और न ही संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए.

ग्रामीणों में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग: घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल गुलदार को पकड़ने, प्रभावित परिवार को मुआवजा देने और क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक और मासूम की कुर्बानी के बाद प्रशासन नींद से जागेगा? या फिर पहाड़ के गांव यूं ही गुलदार के खौफ में जीने को मजबूर रहेंगे?

और पढ़ें

मतदान सर्वेक्षण

0
Default choosing

Did you like our plugin?

Poola Jada

और पढ़ें