March 17, 2026 4:31 pm

उत्पीड़न मामलों में महिलाओं की सरकार करती है मदद, अब नाबालिग बालक-बालिका के लिए अलग से आदेश

गैरसैंण: बीती रोज मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. खासकर महिलाओं, युवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के रोजगार के साधन बढ़ाने, कौशल विकास, सरकारी एवं निजी संस्थानों में नौकरी मुहैया कराने के लिए तीनों वर्गों के लिए अलग-अलग नीति बनाई जाएगी. इसके अलावा उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता (संशोधन) योजना को मंजूरी दी गई.

कैबिनेट बैठक प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे सरकारी सेवाओं, नीट, नर्सिंग, विदेशी भाषाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर युवाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी. साथ ही युवा महोत्सव और रोजगार मेलों का आयोजन कर बड़े स्तर पर युवाओं को मंच दिया जाएगा.

इसक अलावा व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्कूल आपसी समन्वय से काम करेंगे. युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम किया जाएगा.

उत्तराखंड में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मौन पालन, एप्पल मिशन एवं बागवानी जैसी योजनाएं शुरू होंगी. हर ब्लॉक में शुरुआती चरण में 200 लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाया जा सके.

उत्तराखंड में शुरू होगी स्वैच्छिक चकबंदी योजना: उत्तराखंड में स्वैच्छिक चकबंदी योजना शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही कृषि विभाग और आईटीबीपी के बीच एमओयू (MoU) किया गया है. जिससे लोकल उत्पादों जैसे फल, सब्जी के साथ दूध की खरीद सुनिश्चित हो सकेगी.

लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एसएसबी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी एमओयू यानी समझौता ज्ञापन किए जाएंगे. उद्योग विभाग के माध्यम से निजी क्षेत्रों में भी मार्केट लिंकेज की व्यवस्था होगी. जिससे लोकल लोगों की आजीविका और आर्थिकी मजबूत होगी.

पूर्व सैनिकों को भी उपनल के जरिए रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है. उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा और उनकी योग्यता के आधार पर अलग-अलग संस्थानों में सेवाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा.

उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना 2025: वहीं, धामी कैबिनेट ने उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना 2025 को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य साक्षियों यानी गवाहों को डर, दबाव या बदला से मुक्त रखकर कोर्ट में स्वतंत्र व सत्यनिष्ठा से गवाही देने के लिए सुरक्षित वातावरण मुहैया कराना है.

साक्षी संरक्षण योजना में पहचान की गोपनीयता, स्थान परिवर्तन, संपर्क विवरण में बदलाव, भौतिक सुरक्षा एवं वित्तीय सहायता जैसी व्यवस्थाएं होंगी. न्यायपालिका, पुलिस एवं वरिष्ठ अधिकारियों की समिति समयबद्ध रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

इसके अलावा धामी सरकार ने महिला अपराध के मामले में महिलाओं को दी जाने वाली सहायता को लेकर अब नाबालिगों में भी स्थिति स्पष्ट की है.

महिला उत्पीड़न के मामले में अब तक जो भी मदद महिलाओं को दी जाती थी, उसको लेकर अब तक नाबालिग लड़कों और लड़कियों के मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं थी. जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मदद सभी को दी जाएगी. चाहे वो नाबालिग बालक हो या बालिका. कई मामलों में इसको लेकर असमंजस की स्थिति बन रही थी.”शैलेश बगौली, गृह सचिव

इसके अलावा उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता (संशोधन) योजना 2025 को भी गैरसैंण में हुई कैबिनेट में संशोधित कर मंजूरी दी गई है. इसके तहत पॉक्सो पीड़ितों के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की जाएगी. ताकि, उन्हें समयबद्ध और प्रभावी तरीके से सहायता मिल सके.

उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना 2025 को अपराध से पीड़ित बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. जिसके तहत साल 2013 से संचालित अपराध से पीड़ित सहायता/क्षतिपूर्ति योजना को 2025 में दोबारे संशोधित किया है. अब पॉक्सो अधिनियम 2012 के अंतर्गत पीड़ित बच्चों को समयबद्ध और प्रभावी आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी.

इस संशोधित योजना का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि लैंगिक अपराधों से प्रभावित बच्चों को जल्द न्याय संगत सहयोग मिल सके. इसके अलावा सहायता राशि की सीमा भी स्पष्ट तौर पर निर्धारित की गई है. ताकि, कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में पीड़ित बच्चों तक राहत पहुंच सके.

उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता (संशोधन) योजना 2025: उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना 2013 के अनुसार पॉक्सो कोर्ट की ओर से लैंगिक अपराधों से नाबालिग का संरक्षण अधिनियम 2012 यानी POCSO Act के तहत पीड़ितों को क्षतिपूर्ति भुगतान के लिए अलग से आदेश पारित किए गए हैं.

वर्तमान योजना में पॉक्सो पीड़ितों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान न होने की वजह से विभाग को व्यावहारिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था. इस कठिनाइयों का समाधान निकालते हुए और कोर्ट के आदेशों के पालन की दिशा में योजना में संशोधन कर उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता (संशोधन) योजना 2025 लाई गई हैं.

पीड़ित बच्चों को सहायता राशि: नई व्यवस्था के तहत पीड़ित बच्चों को अपराध की प्रकृति के आधार पर प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 4) में 1 लाख से 7 लाख रुपए, गंभीर प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 6) में 1 लाख से 7 लाख रुपए, लैंगिक हमला (धारा 7) में 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी.

इसके अलावा गंभीर लैंगिक हमला (धारा 9) में 50 हजार से 2 लाख, लैंगिक उत्पीड़न (धारा 11) में 20 हजार से 1 लाख और अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग (धारा 14) में 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता राशि सरकार की ओर से दी जाएगी.

वहीं, पॉक्सो अधिनियम 2012 में पहले से 18 साल से कम उम्र के बच्चे इस योजना के अंतर्गत संरक्षित हैं. यह संशोधित योजना अपराध से प्रभावित बच्चों को जल्द, न्यायसंगत और पर्याप्त वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराएगी.

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