February 16, 2026 4:33 am

सहमति से संबंध के बाद शादी से पीछे हटना दुष्कर्म नहीं ! उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…

नैनीताल उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सहमति से लंबे समय तक चले शारीरिक संबंधों के बाद यदि शादी का वादा पूरा नहीं होता तो ऐसे मामले में अपराध साबित करने के लिए यह जरूरी है कि शादी का वादा शुरू से ही झूठा और केवल सहमति हासिल करने का बहाना हो. जस्टिस आशीष नैथानी की एकल पीठ ने आरोपी सूरज बोरा के खिलाफ मसूरी पुलिस में दर्ज दुष्कर्म के केस और चार्जशीट को रद्द कर दिया. कोर्ट ने फैसला दिया कि कार्यवाही जारी रखना आरोपी के लिए उत्पीड़न साबित होगा.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस आशीष नैथानी की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि “किसी वयस्क महिला द्वारा दी गई सहमति मात्र इसलिए अमान्य नहीं हो जाती क्योंकि संबंध बाद में शादी में नहीं बदला.” धारा 376 के तहत अपराध तभी बनता है जब साबित हो कि आरोपी का इरादा शुरू से शादी करने का नहीं था और वादा सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने का साधन था. दोनों पक्ष लंबे समय से रिश्ते में थे, बार-बार सहमति से संबंध बने, जो प्रारंभिक धोखाधड़ी के बजाय आपसी सहमति का संकेत देता है.

क्या है सूरज बोरा केस

मसूरी की महिला ने आरोप लगाया था कि सूरज बोरा ने 45 दिनों में शादी का आश्वासन देकर उससे शारीरिक संबंध बनाए. पुलिस ने जांच के बाद 22 जुलाई 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी. आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस रद्द करने की मांग की. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों वयस्क थे, रिश्ता लंबा चला और कोई ठोस सबूत नहीं कि वादा कपटपूर्ण था—यह महज असफल रिश्ता था. राज्य सरकार और पीड़िता पक्ष ने विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने सहमति और लंबे रिश्ते को आधार बनाकर FIR व कार्यवाही खारिज कर दी.

और पढ़ें

मतदान सर्वेक्षण

Poola Jada

और पढ़ें