देहरादून: प्रदेश में अब आपदा आने से पहले ही सटीक चेतावनी मिल सकेगी। राज्य सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (AWS) और डॉप्लर रडार आने वाले समय में मौसम की हर हलचल पर नजर रखेंगे, जिससे समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सकेगा और नुकसान को कम किया जा सकेगा।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार रक्षा भू-स्थानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) द्वारा 10 जनपदों में नए AWS लगाए जाएंगे। उत्तरकाशी और टिहरी में सबसे ज्यादा 8-8 स्टेशन स्थापित होंगे। पौड़ी में 7, देहरादून में 5, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में 3-3, अल्मोड़ा में 2 और नैनीताल व हरिद्वार में एक-एक स्टेशन लगाए जाएंगे। इनसे रियल टाइम मौसम अपडेट मिलेंगे और चेतावनी प्रणाली अधिक सटीक बनेगी।
इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत और चमोली में से तीन स्थानों पर डॉप्लर रडार स्थापित करेगा। रडार के जरिए बादलों की गतिविधि, भारी वर्षा और संभावित आपदा की लाइव मॉनिटरिंग हो सकेगी।
जीआईएस पर दिखेगा राहत संसाधनों का पूरा नेटवर्क
राज्य में मौजूद सभी आपदा राहत उपकरणों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। इससे किसी भी आपदा के समय यह तुरंत पता चल सकेगा कि किस स्थान पर कौन-सा संसाधन उपलब्ध है और राहत कार्य कितनी जल्दी शुरू किया जा सकता है।
आपदा में भी नहीं टूटेगा संचार
मोबाइल और इंटरनेट ठप होने की स्थिति से निपटने के लिए हर जनपद में डिजास्टर डेडिकेटेड रेडियो नेटवर्क (DDRN) स्थापित किया जाएगा। यह सुरक्षित संचार प्रणाली प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं और राहत एजेंसियों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखेगी।
तहसील स्तर तक बनेगा इमरजेंसी कंट्रोल सिस्टम
राज्य और जनपद स्तर के कंट्रोल रूम की तर्ज पर अब तहसीलों में भी आपातकालीन परिचालन केंद्र (TEOC) बनाए जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर तुरंत रेस्क्यू और राहत कार्य शुरू हो सके।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को एनडीएमआईएस पोर्टल पर आपदा मद में हुए खर्च का विवरण समय से अपलोड करने और लंबित राहत मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए। साथ ही आपदाओं में मृत नेपाली मूल के लोगों को सहायता से जुड़े मामलों को भी जल्द आगे बढ़ाने को कहा गया।











