देहरादून: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता नहीं दिए जाने को राज्य सरकार की बड़ी विफलता बताया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक फैकल्टी, प्रयोगशालाएं और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न करा पाना सरकार की लापरवाही को दर्शाता है।
यशपाल आर्य ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में आवश्यक संख्या के मुकाबले केवल 13 फैकल्टी कार्यरत हैं, जबकि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में करीब 85 फैकल्टी की आवश्यकता के सापेक्ष केवल 6 फैकल्टी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य और आधारभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं, जिसके कारण दोनों कॉलेज एनएमसी के मानकों पर खरे नहीं उतर सके।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती समय पर क्यों नहीं की गई, निर्माण कार्य अधूरे क्यों रहे और एनएमसी निरीक्षण से पहले कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
यशपाल आर्य ने कहा कि यह केवल दो मेडिकल कॉलेजों का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण राज्य के विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है और डॉक्टरों की कमी और बढ़ सकती है।
उन्होंने मांग की कि दोनों मेडिकल कॉलेजों में तत्काल फैकल्टी की नियुक्ति की जाए, अधूरे निर्माण कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र ऑडिट कर उनकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।










