July 26, 2026 5:37 am

वनाग्नि की आशंका के बीच वन विभाग सतर्क, 13 जिलों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

देहरादून। प्रदेश में तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए वन विभाग ने जंगलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का नोडल अधिकारी बनाते हुए निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी है।

वन विभाग ने आठ वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य के 13 जिलों की जिम्मेदारी दी है। इन अधिकारियों का काम जंगलों में आग की स्थिति पर नजर रखना, समय-समय पर निरीक्षण करना और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा।

दरअसल उत्तराखंड में हर साल 15 फरवरी से फॉरेस्ट फायर सीजन शुरू हो जाता है। इस दौरान तापमान बढ़ने और जंगलों में सूखी पत्तियों व घास के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। हालांकि इस साल फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के कारण जंगलों में नमी बनी रही और आग की घटनाएं कम देखने को मिलीं। लेकिन मार्च के बाद तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए विभाग सतर्क हो गया है।

वन मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे को अल्मोड़ा जिले की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अपर प्रमुख वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा को पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार जिलों की निगरानी सौंपी गई है। अपर प्रमुख वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी को पिथौरागढ़ जिले का नोडल अधिकारी बनाया गया है।

मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों को भी कई जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। संजीव चतुर्वेदी को नैनीताल और उधम सिंह नगर, पीके पात्रो को टिहरी और देहरादून तथा राहुल को उत्तरकाशी जिले का नोडल बनाया गया है। इसके अलावा बीजू लाल को चंपावत और बागेश्वर तथा विनय भार्गव को रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वन विभाग ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में वनाग्नि की स्थिति पर लगातार नजर रखें और समय-समय पर फील्ड भ्रमण कर आग की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साथ ही उन्हें संबंधित वन प्रभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर रोकथाम से जुड़े कार्यों की समीक्षा करनी होगी।

विभाग का मानना है कि अप्रैल और मई के महीनों में तापमान बढ़ने के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इस बार जंगलों में सूखी पत्तियों और घास की मात्रा भी अधिक है, जिससे आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

वन विभाग का कहना है कि इस बार वनाग्नि से निपटने के लिए पहले से बेहतर तैयारी की गई है। विभिन्न वन प्रभागों में जरूरी उपकरण और संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। साथ ही फॉरेस्ट फायर सीजन में तैनात कर्मचारियों का बीमा भी किया गया है।

आग की घटनाओं पर तेजी से नियंत्रण पाने के लिए आधुनिक उपकरणों और तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। विभाग को उम्मीद है कि बेहतर निगरानी और तैयारियों के चलते इस बार जंगलों में आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

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