June 10, 2026 1:36 am

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन में पूर्व सैनिक निभाएंगे अहम भूमिका, लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी ने संभाला कार्यभार

देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के नव नियुक्त उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया और नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।

कार्यभार संभालने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल भण्डारी ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है और आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी व जन-केंद्रित बनाने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य के अधिकाधिक पूर्व सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं जवानों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के लगभग प्रत्येक गांव में पूर्व सैनिक मौजूद हैं, जिनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और मैदानी अनुभव आपदा जोखिम न्यूनीकरण, खोज एवं बचाव कार्यों तथा सामुदायिक आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने बताया कि राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सशक्त बनाने, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और पूर्व सैनिकों के समन्वय से प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने की योजना है।

इस अवसर पर सचिव विनोद कुमार सुमन ने विश्वास जताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल भण्डारी के व्यापक सैन्य, प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव का लाभ राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मिलेगा तथा उनके मार्गदर्शन में विभिन्न योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी ने भारतीय सेना में करीब 38 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। उन्होंने थल सेना प्रशिक्षण स्कूल, लद्दाख स्काउट रेजीमेंटल सेंटर लेह, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडाउन, मराठा रेजीमेंट और नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों में दायित्व निभाए हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन पवन (श्रीलंका), ऑपरेशन मेघदूत (सियाचिन) और ऑपरेशन विजय (कारगिल) में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी वे पूर्व सैनिकों के संगठनात्मक सशक्तिकरण और कल्याण से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं तथा उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक के रूप में योगदान दे चुके हैं।

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