देहरादून: उत्तराखंड में सरकार के चार साल पूरे होने पर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार के चार साल बेमिसाल नहीं बल्कि बेहाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आकार बढ़ने के बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है और महंगाई लगातार बढ़ रही है।
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रदेश में आय के स्रोत लगातार घट रहे हैं और हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कुपोषण की दर बढ़कर लगभग 56 प्रतिशत तक पहुंच गई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं के साथ भी छल किया है। सरकार जहां 30 हजार लोगों को रोजगार देने का दावा कर रही है, वहीं रोजगार कार्यालयों में करीब 10 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पलायन लगातार बढ़ रहा है। करीब 1726 गांव निर्जन हो चुके हैं और लगभग 1700 विद्यालय बंद हो गए हैं। इसके बावजूद पलायन रोकने के लिए कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि पहाड़ों के अस्पताल और मेडिकल कॉलेज रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन के मामले में भी सरकार विफल साबित हुई है। मानव और वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए भी कोई प्रभावी नीति नहीं बनाई गई है। इसके अलावा उन्होंने अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खनन, भू और शराब माफियाओं को सरकार का संरक्षण मिल रहा है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी सरकार के चार साल पूरे होने पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने पूरे कार्यकाल का विस्तृत श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।
यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। पहाड़ों से पलायन लगातार जारी है और कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने के बजाय सच्चाई जनता के सामने रखे। उन्होंने सवाल उठाया कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए, युवाओं को रोजगार देने के लिए कितनी भर्तियां हुईं और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर क्या सुधार किए गए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास रखती है तो उसे बिना देरी किए चार साल का श्वेत पत्र जारी कर सभी सवालों का जवाब देना चाहिए। प्रदेश की जनता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं है, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है।











