August 30, 2025 4:26 am

मोदी ने लाल किले के प्राचीर से अमेरिका के लिए रेडलाइन और डेडलाइन दोनों ही खींच दी 

दिल्ली: यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से लाल किले के प्राचीर से देश और दुनिया को हैरान करते रहे हैं पर इस बार की बात अलग थी.क्योंकि इस बार दुनिया के सबसे ताककतवर और अमीर मुल्क को मेसेज देना था. पूरा भारत इसी बात का इंतजार भी कर रहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को आज पीएम मोदी  जरूर जवाब देंगे.  शायद पीएम भी जनभावनाओं को समझ रहे थे इसलिए उन्होंने अपने स्पीच में पाकिस्तान और अमेरिका के लिए बहुत कुछ ऐसा कहा जो इन देशों को अच्छा नहीं लगा होगा. भारत के खिलाफ ट्रंप की हर नकारात्मकता का जवाब पीएम ने बिना अमेरिका का नाम लिए बहुत सकारात्मक तरीके से दिया.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को ध्यान में रखते हुए मोदी ने आज बहुत सी ऐसी बातें कीं जो अमेरिका के लिए रेडलाइन और डेडलाइन की तरह हैं. पीएम के भाषण का अगर ठीक ढंग से विश्वेषण करेंगे तो यह साफ दिखेगा कि अमेरिका के लिए उन्होंने कुछ रेडलाइन तय कर दी हैं जिन्हें पार करना अस्वीकार्य है. इसी तरह उन्होंने डेडलाइन (समयबद्ध अपेक्षाएं) भी तैयार किया है. जाहिर है कि ये रेडलाइन और डेडलाइन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, क्षेत्रीय सुरक्षा, और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है.यही कारण है कि 15 अगस्त 2025 का मोदी का लाल किले से दिया गया भाषण भारी राजनीतिक और कूटनीतिक संदेशों के लिए भी वर्षों तक याद किया जाएगा.

1- किसानों और मछुआरों के हितों के रक्षा के लिए दीवार बन जाएंगे , मतलब टैरिफ से डरेंगे नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतन्त्रता दिवस के अपने संबोधन में किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों को पहली प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी भलाई तथा हितों की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मैं किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़ा हूं. इस वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी नीति या दबाव के आगे वो झुकने वाले नहीं . ये अमेरिका के लिए एक रेडलाइन था कि वो समझ ले कि भारत टैरिफ से डरने वाला नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने आज से पहले भी यह बात कही थी कि वह किसानों के लिए व्यक्तिगत राजनीतिक कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं.

2-दाम कम-दम ज्यादा का मंत्र, मतलब अमेरिका  के बाहर भी बाजार है

मोदी ने अपने स्पीच में दाम कम-दम ज्यादा का मंत्र दिया. इसका सीधा अर्थ है कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता की प्रतिबद्धता. मोदी ने अपने स्पीच में मेक इन इंडिया, सेमीकंडक्टर मिशन, ईवी आदि के लिए वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने की बात कही, जो स्पष्टतया अमेरिकी टैरिफ और निर्यात बाधाओं का जवाब था. यह मंत्र भारत की आर्थिक और औद्योगिक नीति में आत्मनिर्भरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है.

मोदी ने इस मंत्र के माध्यम से भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से MSMEs (लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्यमों) को प्रोत्साहित किया कि वे वैश्विक बाजार में किफायती, उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करें. यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देता है.

उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और अन्य क्षेत्रों में इस मंत्र को लागू करने की आवश्यकता बताई. उदाहरण के लिए, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मेड इन इंडिया उत्पाद लागत कम रखकर भी उच्च प्रदर्शन दे सकते हैं. यह मंत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है. यह मंत्र अपरोक्ष रूप से अमेरिका जैसे देशों को संदेश देता है कि भारत किफायती और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ेगा.

3-स्वदेशी रक्षा प्रणाली , जैसे भारतीय जेट और सुदर्शन चक्र

सुदर्शन चक्र मिशन अपरोक्ष रूप से अमेरिका को एक मजबूत संदेश दिया है. इस मिशन का उद्देश्य 2035 तक एक ऐसी स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों को नष्ट करने के साथ-साथ जवाबी कार्रवाई में सक्षम हो.याद करिए कभी भारत को कभी अमेरिका क्रायोजेनिक इंजन देने से मना कर दिया था. यह घोषणा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित करती है, जो अमेरिका के लिए कई स्तरों पर संदेश देती है. मतलब कि अमेरिका यह समझ ले कि हमें उसकी तकनीक की भी जरूरत नहीं है.ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय स्वदेशी हथियारों का जलवा अमेरिका देख ही चुका है.

सुदर्शन चक्र मिशन अमेरिका के गोल्डन डोम मिशन के समानांतर है, जो एक उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली है. यह अमेरिका को स्पष्ट संकेत है कि भारत वैश्विक मिसाइल रक्षा परिदृश्य में एक स्वतंत्र खिलाड़ी बन रहा है और रक्षा तकनीक में अमेरिका को अब चौधरी बनने की कोई जरूरत नहीं है. यह अमेरिका के लिए एक रेडलाइन है, जो दर्शाता है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी समर्थन पर निर्भर नहीं रहेगा.

स्वदेशी फाइटर जेट इंजन 

स्वदेशी फाइटर जेट इंजन की बात भी अपरोक्ष रूप से अमेरिका को एक महत्वपूर्ण संदेश था. मोदी ने युवाओं और इंजीनियरों से आह्वान किया कि अब हमें मेड इन इंडिया फाइटर जेट इंजन बनाना चाहिए. यह बयान भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी स्वायत्तता को बढ़ाने की दिशा में एक स्पष्ट कदम था. यह घोषणा अमेरिका को यह संकेत देती है कि भारत रक्षा प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से फाइटर जेट इंजनों में, विदेशी निर्भरता, खासकर अमेरिकी कंपनियों जैसे जनरल इलेक्ट्रिक (GE) पर, कम करना चाहता है. भारत वर्तमान में अपने तेजस और AMCA जैसे विमानों के लिए GE के इंजन उपयोग करता है.

4-तेल के लिए समुद्र मंथन अमेरिका को संदेश था 

डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई 2025 को पाकिस्तान के साथ एक तेल समझौते की घोषणा की थी, जिसमें अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर पाकिस्तान के तथाकथित विशाल तेल भंडार का विकास करेंगे. ट्रंप ने यह समझौता भारत को चिढ़ाने के लिए किया था. इसकी तसदीक ट्रंप का यह कथन करता है कि शायद पाकिस्तान भविष्य में भारत को तेल बेच सकता है.

मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए ‘नेशनल डीपवाटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ की घोषणा की, जिसे उन्होंने ‘समुद्र मंथन’ की संज्ञा दी. यू्ं तो इसका इसका उद्देश्य समुद्र की गहराइयों में तेल और गैस भंडार की खोज करना है, ताकि भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता, खासकर पेट्रोल और डीजल के आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपये को कम किया जा सके. पर इसके गहरे निहितार्थ हैं. यह सीधे अमेरिका को चैलेंज है.तुम पाकिस्तान से तेल निकालों, देखो हम तुमसे पहले तेल का भंडार खोज लेते हैं.

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