देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों से बनी झीलों से उत्पन्न होने वाली बाढ़ के खतरे को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। चमोली जिले की वसुंधरा ताल में पहली बार पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है। इस प्रणाली को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की ने विकसित किया है। इसके स्थापित होने से झील की निगरानी और संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) के खतरे का समय रहते आकलन करने में मदद मिलेगी।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वसुंधरा ताल उत्तराखंड की पहली हिमनद झील है, जहां पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है। यह अभियान उच्च हिमालयी क्षेत्र में किसी हिमनद झील पर निगरानी और पूर्व चेतावनी तंत्र स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान 15 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय हिमनद झील आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान दल में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक तथा तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। दल का उद्देश्य हिमनद झीलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते चेतावनी देने की क्षमता विकसित करना है।
दुर्गम क्षेत्र में सुरक्षा और संचार के विशेष इंतजाम
उच्च हिमालयी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए अभियान दल के साथ राज्य आपदा प्रतिवादन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान भी तैनात हैं। ये दल की सुरक्षा, आवागमन और अभियान से जुड़े कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से अभियान के लिए आवश्यक समन्वय और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
अभियान दल को उपग्रह फोन और निम्न पृथ्वी कक्षा में संचालित संचार उपकरण भी दिए गए हैं। इनके माध्यम से मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी दल का प्राधिकरण के साथ संपर्क और समन्वय बना रहेगा। वसुंधरा ताल में स्थापित पूर्व चेतावनी प्रणाली से हिमनद झीलों की निगरानी को मजबूती मिलने और ग्लॉफ जैसी आपदाओं के जोखिम को कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।












