October 14, 2026 4:03 am

दायित्वधारियों को चुनावी जिम्मेदारी देने पर घिरी भाजपा, कांग्रेस ने उठाए सरकारी धन के दुरुपयोग के सवाल

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा की ओर से सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इन प्रभारियों में 18 ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार में दायित्वधारी मंत्री का दर्जा प्राप्त है। सरकार की ओर से इन नेताओं को गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। ऐसे में कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने वाले नेताओं को पार्टी के चुनावी और संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी देना उचित है या नहीं। कांग्रेस ने दायित्वधारियों को सरकारी पदों से हटाने की मांग करते हुए सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के लिए प्रदेश की सभी 70 सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन नेताओं को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। नियुक्तियों में सरकार में दायित्वधारी मंत्री का दर्जा प्राप्त जगत सिंह चौहान, रामचंद्र गौड़, ऋषि प्रसाद सती, जोत सिंह बिष्ट, बच्चन सिंह पवार, मधु भट्ट, अभिषेक शाही, भुवन विक्रम डबराल, अनुराधा वालिया, शोभाराम प्रजापति, नितिन गौतम, विशाल गुप्ता, जयपाल चौहान, श्यामवीर सैनी, विजय कपरवान, श्याम नारायण पांडे, सुभाष बगौली और दीपक मेहरा के नाम शामिल हैं। इन नियुक्तियों के बाद सरकारी जिम्मेदारियों और पार्टी संगठन के कार्यों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

भाजपा ने नियुक्तियों को बताया सामान्य प्रक्रिया

भाजपा ने कांग्रेस के सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि दायित्वधारी नेता भी पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं और सरकार की योजनाओं तथा कार्यों को जनता तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि पार्टी नेताओं को सरकार में दायित्व दिए जाने का उद्देश्य सरकार के बेहतर कामों को आगे बढ़ाना है। यदि संगठन भी उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपता है, तो इसमें परेशानी की बात नहीं है।

कांग्रेस ने की दायित्वधारियों को पद से हटाने की मांग

कांग्रेस ने भाजपा की इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं लेने वाले नेताओं से यदि पार्टी संगठन का काम कराया जाता है, तो सरकारी और राजनीतिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में नई परंपरा डाल रही है और सरकारी धन का इस्तेमाल संगठन के कार्यों में करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन दायित्वधारियों से संगठन का काम लेना है, तो उन्हें सरकारी पदों से हटा दिया जाना चाहिए।

सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल सरकारी सुविधाओं के वास्तविक इस्तेमाल और उनके उद्देश्य को लेकर है। दायित्वधारियों को सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं सरकारी कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी जैसी जिम्मेदारियों के लिए होती हैं। ऐसे में यदि इन सुविधाओं का इस्तेमाल पार्टी के संगठनात्मक या चुनावी कार्यक्रमों में किया जाता है, तो इसकी नियमों के अनुरूप जांच जरूरी होगी। हालांकि, केवल विधानसभा प्रभारी नियुक्त किए जाने से सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए सरकारी संसाधनों के वास्तविक उपयोग और संबंधित नियमों की पड़ताल आवश्यक है। फिलहाल भाजपा की नियुक्तियों ने सरकार और संगठन की जिम्मेदारियों के बीच अंतर तथा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

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