July 13, 2026 12:57 am

सरकारी अनुदान बंद, अब कैसे चलेंगे उत्तराखंड के मदरसे? जानिए सरकार का नया प्लान

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के अरबिया मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान को वित्तीय वर्ष 2027-28 से समाप्त करने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मदरसों को अनुदान देने से संबंधित बजट मद को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि अब मदरसों को सीधे अनुदान देने के बजाय उन्हें शिक्षा विभाग और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

नई व्यवस्था के तहत मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मदरसों की मान्यता, संचालन और निगरानी का कार्य करेगा। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था की प्रमुख बातें

  • वित्तीय वर्ष 2027-28 से मदरसों को मिलने वाला सरकारी अनुदान समाप्त।
  • मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण करेगा संचालन और मान्यता।
  • सभी मदरसों को नई नियमावली के तहत प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य होगा।
  • सरकार का फोकस प्रत्यक्ष अनुदान के बजाय योजनाओं आधारित सहायता पर रहेगा।
  • आधुनिक विषयों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

यू-डाइस से मिलेंगी सरकारी योजनाओं की सुविधाएं

अल्पसंख्यक बोर्ड के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, अब मान्यता प्राप्त मदरसों को यू-डाइस (UDISE) प्रणाली से जोड़ा जाएगा। यह शिक्षा मंत्रालय का राष्ट्रीय डाटाबेस है, जिसके माध्यम से विद्यालयों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है।

यू-डाइस कोड मिलने के बाद मिलेंगे ये लाभ

  • समग्र शिक्षा अभियान के तहत सहायता।
  • विद्यालय भवन, अतिरिक्त कक्ष और आधारभूत सुविधाओं के लिए सहयोग।
  • शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं का विकास।
  • प्रधानमंत्री श्री विद्यालय योजना के तहत स्मार्ट क्लास, डिजिटल लैब और आधुनिक शिक्षण संसाधन।
  • प्रधानमंत्री पोषण (मिड-डे मील) योजना का लाभ।
  • विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में पात्रता।
  • कंप्यूटर लैब, डिजिटल शिक्षा और आईसीटी योजनाओं का लाभ।
  • पुस्तकालय और शैक्षिक संसाधनों के विकास के लिए सहायता।
  • राज्य सरकार की कौशल विकास एवं अन्य शिक्षा योजनाओं में प्राथमिकता।

वक्फ बोर्ड ने दिया सहयोग का भरोसा

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर मदरसों को नई व्यवस्था के अनुरूप संचालन में यदि कठिनाई आती है तो वक्फ बोर्ड उनकी हरसंभव सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोड़ना है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का विरोध कर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब आगे क्या होगा?

सरकार के फैसले के बाद प्रदेश के मदरसों का संचालन पूरी तरह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन होगा। सरकार का दावा है कि प्रत्यक्ष अनुदान के बजाय योजनाओं पर आधारित यह मॉडल अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगा। हालांकि, आर्थिक रूप से कमजोर मदरसों के सामने संसाधनों की चुनौती भी बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था से प्रदेश के मदरसों और वहां अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों को कितना लाभ मिल पाता है।

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