July 7, 2026 12:51 am

श्रीलंका के अधिकारियों को भाया उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल, यूएसडीएमए में किया अध्ययन

देहरादून। उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। सोमवार को नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण कर राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली और आधुनिक तकनीकों का विस्तृत अध्ययन किया।

प्रतिनिधिमंडल को यूएसडीएमए के अधिकारियों ने राज्य में विकसित पूर्व चेतावनी प्रणाली, भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण, मौसम पूर्वानुमान, आपातकालीन संचालन केंद्र, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस) और सामुदायिक सहभागिता आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन केवल राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और आधुनिक तकनीकों के समन्वित उपयोग पर आधारित है।

भ्रमण के दौरान मौसम विशेषज्ञों ने डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र (AWS), स्वचालित वर्षामापी यंत्र (ARG) और उपग्रह आधारित मौसम निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली से भी प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। वहीं उत्तराखंड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) ने ड्रोन सर्वेक्षण, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस मैपिंग और ढलान स्थिरीकरण जैसी तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी।

श्रीलंका के अधिकारियों ने विशेष रूप से भूस्खलन जोखिम प्रबंधन और वर्षा आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली में रुचि दिखाई। अधिकारियों का मानना था कि उत्तराखंड का अनुभव श्रीलंका जैसे आपदा प्रभावित देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि ऐसे अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करते हैं। वहीं एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि संस्थान अब तक 52 देशों के सिविल सेवकों को सुशासन और क्षमता निर्माण से जुड़े प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है।

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