June 28, 2026 1:33 am

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कानूनी प्रक्रिया के बिना अवैध कब्जा नहीं हटा सकता रेलवे

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भूमि पर कथित अवैध कब्जों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना कानून में निर्धारित प्रक्रिया अपनाए किसी भी व्यक्ति को केवल सामान्य प्रशासनिक नोटिस के आधार पर बेदखल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि चाहे कब्जा अवैध ही क्यों न हो, किसी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना संपत्ति से हटाना संविधान और मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने यह निर्णय मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं ने नॉर्दर्न रेलवे के वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (वर्क्स), देहरादून द्वारा जारी बेदखली नोटिस को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे संबंधित संपत्ति पर अपना स्वामित्व दावा करते हैं, जबकि रेलवे ने उनके घरों पर नोटिस चस्पा कर निर्धारित समय के भीतर भूमि खाली करने के निर्देश दे दिए। उनका आरोप था कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अचल संपत्ति से जबरन बेदखल करना, चाहे वह कथित अतिक्रमणकारी ही क्यों न हो, कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना संभव नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति का मालिक भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता और स्थापित कब्जे को हटाने के लिए सक्षम न्यायालय का आदेश आवश्यक है।

कोर्ट ने कहा कि “कानून की उचित प्रक्रिया” का अर्थ है कि संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए, सक्षम अदालत सभी तथ्यों का परीक्षण करे और उसके बाद ही बेदखली का आदेश पारित किया जाए।

अदालत ने यह भी माना कि रेलवे द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को जारी किया गया नोटिस किसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी नहीं किया गया था। इसलिए 30 दिन के भीतर भूमि खाली करने का प्रशासनिक निर्देश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।

हाईकोर्ट ने रेलवे का उक्त नोटिस निरस्त करते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि किसी भूमि पर अवैध कब्जा है तो रेलवे कानून के अनुरूप उचित प्रक्रिया अपनाकर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

और पढ़ें

मतदान सर्वेक्षण

0
Default choosing

Did you like our plugin?

Poola Jada

और पढ़ें