देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार को लेकर एक आम धारणा है कि वहां अल्पसंख्यकों के विरोध में सरकार काम कर रही है. राज्य में UCC लागू करना, मदरसा बोर्ड खत्म करना हो या फिर मदरसे और मजारों के खिलाफ कार्रवाई करना, मुसलमान इससे नाराज़ है. लेकिन उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड, के सद्र मुफ़्ती शमून क़ासमी इसे अल्पसंख्यकों के हित में सरकार का उठाया गया कदम बता रहे हैं.
शमून कासमी ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने राज्य में कई ऐसे बड़े और सख्त फैसले लिए हैं, जिन्हें सरकार सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और सुशासन की दिशा में अहम कदम बता रही है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से जहां एक ओर अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के गठन का फैसला लिया है। सरकार के अनुसार अब राज्य के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध किया जाएगा। नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र भी आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ सकें।
सरकार का कहना है कि पहले अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता सीमित दायरे में थी, लेकिन अब मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदायों के संस्थानों को एक ही प्राधिकरण के तहत लाया गया है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
वहीं, धामी सरकार ने अवैध धार्मिक अतिक्रमणों के खिलाफ भी सख्त अभियान चलाया है। सरकारी और वन भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई जारी है। सरकार के मुताबिक अब तक हजारों एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है और सैकड़ों अवैध धार्मिक ढांचे हटाए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि कई स्थानों पर जांच में धार्मिक स्थलों के नाम पर सिर्फ जमीन कब्जाने के मामले सामने आए।
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है। इसके तहत विवाह, तलाक, संपत्ति और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों को समान रूप से लागू किया गया है। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाया गया है।
धामी सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया है। सरकार का दावा है कि इससे युवाओं का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है और भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष माहौल में आयोजित हो रही हैं।
इसके अलावा पलायन रोकने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मिशन एप्पल और मिलेट मिशन जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से युवाओं, किसानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार इन सभी कदमों को उत्तराखंड को सुरक्षित, आधुनिक और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रही है।











