July 26, 2026 6:48 am

फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला सदन में गूंजा, विधायक हरीश धामी ने उठाया मुद्दा, सरकार ने दिया एक माह में जांच का आश्वासन

गैरसैंण : उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धारचूला से कांग्रेस विधायक Harish Dhami ने कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ब्लॉक प्रमुख बनने का मामला सदन में उठाया। इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री Subodh Uniyal ने एक महीने के भीतर जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

दरअसल, गैरसैंण में चल रहे विधानसभा बजट सत्र के दौरान विधायक हरीश धामी ने नियम 58 के तहत यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ब्लॉक प्रमुख बनने का मामला सामने आया है। विधायक ने सदन में इस संबंध में पूरे तथ्य और दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

हरीश धामी ने कहा कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश की जाएगी। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

नेपाल मूल के बताए पिता

विधायक धामी के अनुसार यह मामला धारचूला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बोधी ग्राम पंचायत से बीडीसी सदस्य मंजुला देवी से जुड़ा है। उनका आरोप है कि मंजुला देवी ने अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र गलत तरीके से बनवाया है।

उन्होंने कहा कि मंजुला देवी के पिता नेपाल मूल के हैं, जबकि उनकी माता अनुसूचित जनजाति वर्ग से आती हैं। आरोप है कि मंजुला देवी ने अपने पिता की जाति के बजाय अपनी माता की जाति के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाया, जो नियमों के अनुसार सही नहीं माना जाता।

अधिकारी की भूमिका की भी हो जांच

विधायक धामी ने कहा कि इस मामले में केवल प्रमाण पत्र बनवाने वाले व्यक्ति की ही नहीं, बल्कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव के दौरान ही इस मामले को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी और एक अन्य पंचायत सदस्य ने निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान इसकी शिकायत भी की थी।

डीएम की भूमिका पर भी सवाल

विधायक ने कहा कि शिकायत के बावजूद मामला आगे बढ़ गया, जिससे उस समय के जिलाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते शिकायत पर ध्यान दिया जाता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।

फिलहाल विधायक ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सरकार की ओर से सदन में दिए गए आश्वासन के बाद अब एक महीने के भीतर जांच पूरी कर कार्रवाई करने की बात कही गई है।

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