देहरादून: कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने एक कंपनी के सीईओ के खिलाफ धोखाधड़ी और निवेशकों की धनराशि वापस न करने के गंभीर आरोपों के बाद सख्त रुख अपनाया है. कुमाऊं कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के सीईओ के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जनता का एक-एक पैसा हर हाल में वापस कराया जाएगा.
शिकायत के बाद धोखाधड़ी और निवेशकों की धनराशि वापस न करने वाली कंपनी में उस वक्त हड़कंप मच गया. जब कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत कंपनी के कार्यालय आ धमके. इस दौरान उन्हें कार्यालय में कई प्रकार की अनियमितता मिली. जिसके बाद उन्होंने कंपनी के सीईओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए है. दरअसल हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने कुमाऊं कमिश्नर के जनता दरबार में शिकायत दर्ज कराई थी कि कंपनी ने निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की गई है और जमा की गई रकम वापस नहीं की जा रही.
शिकायत पर मंडलायुक्त ने कंपनी के सीईओ को कार्यालय में तलब किया, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. जिसके बाद कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत प्रशासनिक अमले के साथ कंपनी कार्यालय में जा धमके. छापेमारी के दौरान कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कंपनी के दस्तावेज, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और बैलेंस शीट प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन सीईओ किसी भी प्रकार के दस्तावेज या ऑनलाइन पोर्टल का डेटा दिखाने में असफल रहे.
इसी दौरान 10 से 11 अन्य निवेशक भी मौके पर पहुंचे और अपनी जमा धनराशि वापस दिलाने की मांग करने लगे. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के नाम पर निवेश करने के बजाय सीईओ द्वारा व्यक्तिगत रूप से दो स्थानों पर जमीन खरीदी गई है. सीईओ ने स्वीकार किया कि कंपनी पर लगभग 3900 निवेशकों की देनदारी है. बैंक खातों की जांच में एक बैंक खाते में मात्र 42,455 रुपये और अन्य बैंक खाते में लगभग 50 हजार रुपये की राशि पाई गई.
जांच में पाया गया कि कंपनी ने 25 माह में पैसा डबल करने का लालच देकर करीब 8 हजार लोगों से लगभग 39 करोड़ रुपये जमा किए. साथ ही मल्टीलेवल मार्केटिंग के तहत मीडिएटर्स को इंसेंटिव भी दिया जा रहा था. दीपक रावत ने इसे मल्टीलेवल मार्केटिंग और पिरामिड स्कीम्स के नियमों का उल्लंघन, कंपनी एक्ट का उल्लंघन और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी मानते हुए कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.











