July 24, 2026 6:57 am

देहरादून में ABVP राष्ट्रीय अधिवेशन, उत्तराखंडी संस्कृति की दिखी झलक, जानिये छात्रों के अनुभव

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन हो रहा है. तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय अधिवेशन की आज शुरुआत हो गई है. इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश भर से 1500 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. एबीवीपी के इस 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन में उत्तराखंड की संस्कृति को बेहतर ढंग से प्रेजेंट किया गया है. अधिवेशन परिसर में बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम मंदिर की कलाकृति बनाई गई है. इसके अलावा, उत्तराखंड की संस्कृति को दिखाने के लिए उत्तराखंड व्यंजन, उत्तराखंड पहनावा, उत्तराखंड कलाकृति समेत तमाम चीजों के स्टाल और प्रदर्शनी भी लगाया गया है.

देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश भर से 1500 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं. ऐसे में अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधि जो उत्तराखंड राज्य में पहली बार आए हैं उनको उत्तराखंड की संस्कृति और परिसर में बनी कलाकृतियां काफी अधिक पसंद आ रही है. नेपाल की रहने वाली जमुना ने कहा वे पहली बार पहली बार उत्तराखंड आ रही हैं. उन्होंने कहा यहां पर आकर उन्होंने उत्तराखंड के ट्रेडिशनल कलर को देखा, जो उनको काफी अधिक पसंद आया.

असम की रहने वाली शीतू ने कहा एबीवीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन पहली बार उत्तराखंड में हो रहा है. जिसके चलते पहली बार इस अधिवेशन के लिए उत्तराखंड आई हैं. उन्होंने बताया उत्तराखंडी व्यंजन उनको काफी अधिक पसंद आया है. उन्होंने कहा वे भी हिल एरिया से आती हैं. उन्होंने बताया वे सबसे पहले हरिद्वार गई, जहां उन्होंने गंगा स्नान किया. उसके बाद ऋषिकेश में गंगा आरती में शामिल हुई. असम में गंगा नहीं है. जिसके चलते वह गंगा स्नान करने और गंगा आरती में शामिल होने के लिए तरसते हैं.

शीतू ने कहा परिसर में उत्तराखंड संस्कृत से संबंधित लगाए गए स्टॉल में हस्तकला, ट्रेडिशनल ड्रेस, ट्रेडिशनल ज्वेलरी, पहाड़ी व्यंजन समेत तमाम चीजों को उन्होंने देखा. जब वह आज सुबह कार्यक्रम स्थल पर पहुंची तब उनका स्वागत स्थानीय वाद्य यंत्रों ढोल नगाड़ा और स्थानीय नृत्य के जरिए किया गया. जिसको देखकर काफी अच्छा लगा. उन्होंने कहा असम में मां कामाख्या देवी का मंदिर है. उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम है.

वहीं, केरल की रहने वाली अश्वनी ने कहा कि वो कैलाशी हैं. उत्तराखंड में आकर के बहुत अच्छा महसूस कर रही हैं. उत्तराखंड आकर के तमाम कलर को देखने का मौका मिला. यहां बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम मंदिर की प्रतिमा लगाई गई है. उन्हें यहां आकर उत्तराखंड की संस्कृति को जानने का मौका मिल रहा है.

अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले चौटेवा मनंग ने कहा वे पहली बार उत्तराखंड आए हैं. यहां वे उत्तराखंड की संस्कृति को देख समझ रहे हैं. उन्होंने कहा प्रदर्शनी का वे अवलोकन कर रहे हैं. जिसके जरिये उन्हें जानकारी मिल रही है. उन्होंने कहा यहां सभी चीजे सीखने वाली हैं.

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