January 22, 2026 8:43 pm

वन्यजीवों का दीदार शुरू, सैलानियों के लिए खोले गए राजाजी टाइगर रिजर्व के गेट

देहरादून: राजाजी टाइगर रिजर्व के सभी पर्यटन गेट आज 15 नवंबर से विधिवत वन्यजीव पर्यटन के लिए खोल दिए गए. राजाजी की मोतीचूर, चीला, रानीपुर और मोहंड रेंज अपने वन्यजीव पर्यटन के लिए विख्यात हैं. मोतीचूर रेंज में विधिवत तरीके से पूजा अर्चना की गई. रेंज अधिकारी महेश सेमवाल और वार्डन सरिता भट्ट ने रीबन काट पर्यटक सीजन की शुरुआत की. वहीं चीला रेंज में वार्डन चित्रांजलि नेगी, रेंज अधिकारी बीडी तिवारी और रेंज अधिकारी राजेश जोशी ने विधि विधान के साथ पहले पूजा अर्चना की और रिबन काटकर चीला पर्यटन मार्ग को खोला गया.

मोतीचूर रेंज अधिकारी महेश सेमवाल ने बताया कि पार्क की मोतीचूर रेंज में पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए इस बार नए रिसेप्शन सेंटर का निर्माण किया गया है. साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए. बताया कि बाहर से आने वाले सैलानियों को ज्यादा से ज्यादा वन्यजीवों का दीदार हो, इसके लिए नए वाटर हॉल्स बनाए गए हैं. साथ ही पुराने वाटर हॉल्स में भी पर्याप्त पानी भरा गया है, ताकि वन्यजीवों को जंगल में ही पानी मिल सके.

चीला रेंज पार्क की सबसे पुरानी रेंज: चीला रेंज की वार्डन चित्रांजलि ने बताया कि पार्क में सफारी संचालन सुरक्षित वन भ्रमण के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए किया जाएगा. पिछले वर्ष लगभग 51 हजार 500 सैलानियों ने जंगल सफारी का लुत्फ उठाया था. जिसमें लगभग 49 हजार 500 भारतीय सैलानी और 2000 विदेशी सैलानी शामिल थे. साथ ही लगभग 14 हजार 500 जिप्सियों की एंट्री दर्ज की गई थी. उन्होंने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश के समीप होने और जैव विविधता से समृद्ध होने के कारण राजाजी टाईगर रिजर्व में इको टूरिज्म फल फूल रहा है.

उन्होंने बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, हाथी के अतिरिक्त पक्षियों की भी 315 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है. चीला सफारी ट्रैक राजाजी टाइगर रिजर्व का सबसे पुराना ट्रैक है. जहां बाघ, तेंदुआ, हाथी देखने की संभावना अधिक रहती है. विगत वर्षों में हरिद्वार सफारी गेट और चिल्लावाली सफारी गेट पर तेंदुआ साइटिंग के कारण सैलनियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

हर वर्ष 15 जून को बंद हो जाती है जंगल सफारी: वैसे तो राजाजी टाइगर रिजर्व जंगल सफारी के लिए विश्व प्रसिद्ध है. लेकिन साल भर यहां जंगल सफारी नहीं कराई जाती है. मॉनसून सीजन के चलते 15 जून को पार्क के सभी गेट बंद कर जंगल सफारी रोक दी जाती है. बारिश के कारण जंगल में नदी नाले उफान पर होते हैं और सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. इसलिए 15 जून से 15 नवंबर तक पार्क बंद रहने के दौरान मरम्मत का कार्य भी किया जाता है. मरम्मत कार्य पूर्ण होने के बाद 15 नवंबर को सुबह सवेरे विधि विधान के साथ पार्क की सभी रेंजों के गेट जंगल सफारी के लिए खोल दिए गए हैं.

जिप्सियों के लिए पार्क प्रशासन द्वारा जारी समय सारणी: चीला सफारी गेट में अधिकतम 30 जिप्सी सुबह और 30 जिप्सी शाम को प्रवेश दिया जाता है. चिल्लावाली सफारी गेट में अधिकतम 15 जिप्सी सुबह और 15 जिप्सी शाम को प्रवेश दिया जाता है. हरिद्वार सफारी गेट में अधिकतम 10 जिप्सी सुबह और 10 जिप्सी शाम को प्रवेश दिया जाता है. मोतीचूर सफारी गेट में अधिकतम 15 जिप्सी सुबह और 15 जिप्सी शाम को प्रवेश दिया जाता है.

ऐसे ऑनलाइन भी कर सकते हैं बुकिंग: सफारी हेतु सैलानी ऑनलाइन राजाजी टाइगर रिजर्व की ऑफिशियल वेबसाइट rajajitigerreserve.uk.gov.in और ऑफलाइन पर्यटक सफारी गेट बुकिंग काउंटर से बुक कर सकते हैं. इसके अलावा गेट पर आकर भी जंगल सफारी के लिए बुकिंग की जाती है.

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