June 24, 2026 9:32 pm

दीपावली से पहले शुरू की गई उल्लुओं की निगरानी, तस्करी रोकने को हाई अलर्ट पर वन विभाग…

देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग ने दीपावली पर्व से पहले अपनी निगरानी व्यवस्था को काफी सख्त कर दिया है. विभाग ने न केवल अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को सक्रिय किया है बल्कि चिड़ियाघरों और संरक्षित वन क्षेत्रों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. वजह साफ है, इस समय को वन्यजीव तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, खासकर उल्लुओं की अवैध तस्करी को लेकर.

वन विभाग की इंटेलीजेंस विंग वैसे तो साल भर वन्यजीव तस्करी के मामलों को लेकर सक्रिय रहती है. दीपावली से ठीक पहले का समय विभाग के लिए और भी ज्यादा अहम हो जाता है. शायद ही कारण है कि इस समय वन्य जीव अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह पर विभाग और भी ज्यादा नकेल कसने के प्रयास में जुटा रहता है. फिलहाल इसी तरह के प्रयास विभाग की तरफ से किया जा रहे हैं. 24 घंटे की निगरानी भी बढ़ा दी गई है.

खास बात यह है कि यह गतिविधि न केवल संरक्षित वन क्षेत्र या टाइगर रिजर्व में दिखाई देती है बल्कि चिड़ियाघर में भी इसी तरह के अलर्ट को रखा जाता है. इसमें खासतौर पर विभाग का फोकस उल्लू होते हैं. इस समय पर तंत्र-मंत्र के लिए उल्लू के अंगों की तस्करी की संभावना सबसे ज्यादा होती है.

देहरादून चिड़ियाघर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि हर साल दीपावली के आसपास उल्लू की तस्करी के प्रयास बढ़ जाते हैं. उनका कहना है कि अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की आड़ में उल्लुओं के अंगों का इस्तेमाल करने की गलत परंपरा आज भी जारी है. इसी कारण इस मौसम में तस्कर सक्रिय हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि इसी संभावना को देखते हुए चिड़ियाघर में सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है. सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत किया गया है.

इधर, वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम भी इस समय पूरी तरह अलर्ट मोड में है. विभाग ने ऐसी संभावित जगहों की पहचान की है जहां वन्यजीव तस्करी की गतिविधियां हो सकती हैं. वन विभाग की टीमें लगातार फील्ड में पेट्रोलिंग कर रही हैं. गोपनीय रूप से ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है जो वन्यजीवों के अवैध व्यापार से जुड़े हो सकते हैं.

उल्लू संरक्षण को न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से जरूरी माना जाता है बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी बेहद अहम है. उल्लू खेतों में कीट नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी तस्करी और शिकार दोनों अपराध की श्रेणी में आते हैं.

इस मामले में विभाग की तरफ से जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है. साथ ही अपील की जाती है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव व्यापार की सूचना तुरंत नजदीकी वन कार्यालय या हेल्पलाइन नंबर पर दें. दीपावली के समय जहां उल्लू तस्करी का खतरा बढ़ जाता है. वन विभाग ने साफ कर दिया है कि ऐसी किसी भी गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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