April 20, 2026 10:55 am

उत्तराखंड: पंचायत चुनाव पर अब कल होगी सुनवाई, हाईकोर्ट ने सरकार से कहा जल्दी क्या है? 

नैनीताल: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर लगी रोक को हटाने के सम्बंध में मंगलवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष आज ही केस मेंशन कर सुनवाई करने का अनुरोध किया. याचिका मेंशन करते वक्त सरकार की तरफ कहा गया कि 9 जून को सरकार ने जो नियमावली बनाई थी, उसका गजट नोटिफिकेशन 14 जून को हो गया था.

सरकार ने बताया कम्यूनिकेशन गैप: लेकिन “कम्युनिकेशन गैप” के कारण गजट नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के वक्त प्रस्तुत नहीं किया जा सका था. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें क्या जल्दी है. पिछले एक साल से अधिक समय बीत चुका है, चुनाव नहीं कराए. कोर्ट ने इससे पहले कई बार चुनाव कराने के आदेश दिए थे. उसके बाद भी चुनाव नहीं कराए. अब इसमें क्या जल्दी है.

बुधवार को होगी पंचायत चुनाव पर सुनवाई: आज सरकार की ओर से यह नोटिफिकेशन हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर दिया गया है. नोटिफिकेशन पेश होने के बाद मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव सम्बन्धी सभी याचिकाओं की सुनवाई हेतु 25 जून बुधवार अपरान्ह 2 बजे का समय निर्धारित किया है. तब तक कोर्ट ने लगी रोक को बरकरार रखा है. इस मामले में मंगलवार को दीपिका किरौला और अन्य की याचिकाएं भी सुनवाई को लगी थी. हाईकोर्ट ने इन सभी की एक साथ सुनवाई का निर्णय लिया है.

आरक्षण नियमावली को मिली है चुनौती: मामले के अनुसार बागेश्वर निवासी गणेश कांडपाल और अन्य ने राज्य सरकार द्वारा 9 जून व 11 जून को जारी नियमावली को हाईकोर्ट में याचिका दायर करके चुनौती दी थी. सरकार ने इस नियमावली में राज्य में अब तक के आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित कर दिया था. आरक्षण का नया रोस्टर जारी कर उसे पहली बार वर्तमान चुनाव से लागू माना.

15 से अधिक याचिकाओं पर साथ होगी सुनवाई: याचिकाकर्ता के मुताबिक एक तरफ सरकार का यह नियम कोर्ट के पूर्व में जारी आदेश के खिलाफ है. दूसरा पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 126 के अनुसार कोई भी रूल तभी प्रभावी माना जायेगा, जब उसका सरकारी गजट में प्रकाशन होगा. वहीं एकलपीठ में भी करीब 15 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई हुई. उन मामलों को भी एकलपीठ ने खंडपीठ में सुनवाई के लिए भेज दिया है. अब इस बात को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं कि 14 जून को गजट नोटिफिकेशन के होने के बाद भी सचिवालय सहित अन्य संस्थाओं को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?

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