February 24, 2026 4:53 am

उत्तराखंड में 153 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोग शामिल

देहरादून। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के बाद उत्तराखंड में अब तक 153 हिंदू और सिख शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है। इनमें 147 लोग पाकिस्तान और 6 लोग अफगानिस्तान से आए हैं। ये सभी लंबे समय से राज्य में निवास कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, देहरादून में अभी भी लगभग 40-50 आवेदनों की जांच प्रक्रिया जारी है। नागरिकता प्रदान करने से पहले आवेदकों की विस्तृत जांच राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से की जाती है। सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद ही नागरिकता प्रदान की जाती है।

इन जिलों में बसे हैं शरणार्थी

मुख्य रूप से शरणार्थी देहरादून जिले में निवास कर रहे हैं। इसके अलावा हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और उत्तरकाशी जिलों में भी कुछ परिवारों को नागरिकता दी गई है। नागरिकता मिलने के बाद अब वे भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।

क्या बोले मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सीएए कानून लागू किया है, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 153 लोगों को नागरिकता दी जाना मानवीय मूल्यों को सशक्त करने वाला कदम है और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को भी दर्शाता है।

क्या है CAA?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (Citizenship Amendment Act, 2019) नागरिकता अधिनियम 1955 में किया गया संशोधन है। यह कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।

यह विधेयक 10 दिसंबर 2019 को लोकसभा और 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा से पारित हुआ था। 12 दिसंबर 2019 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद यह कानून बना और 10 जनवरी 2020 से प्रभावी हुआ। 11 मार्च 2024 को इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद देशभर में इसे लागू किया गया।

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