September 26, 2026 4:09 am

उत्तराखंड के विकास में पर्यावरण का संतुलन जरूरी, धामी ने बताया सरकार का विजन

हल्द्वानी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर उत्तराखंड को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए उनकी धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। साथ ही ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी और सर्वेक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हल्द्वानी में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों, संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विचार रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय करीब चार हजार करोड़ रुपये का बजट आज बढ़कर लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में राज्य ने प्रगति की है। उत्तराखंड पर्यटन और फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि प्रति व्यक्ति आय में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार और नई पहचान दिलाई जा रही है। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

हरिद्वार कुंभ मेला-2027 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और कुंभ सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन उत्तराखंड के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी एवं सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता को संरक्षित रखना भी विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा और प्रताप बिष्ट, हल्द्वानी-काठगोदाम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, काशीपुर के महापौर दीपक बाली, दैनिक जागरण के संपादक विजय सिंह यादव, कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी, राज्य संपादक मनोज झा, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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