देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र की अवधि केवल दो दिन रखने और सत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकें देहरादून में आयोजित किए जाने पर सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा के अंतिम सत्र में भी संसदीय परंपराओं की अनदेखी कर रही है। आर्य ने कहा कि सदन की कार्यवाही गैरसैंण में होनी है, लेकिन कार्यमंत्रणा समिति और विधानमंडल दलों के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें देहरादून में कराना गैरसैंण की गरिमा और संसदीय मर्यादाओं पर सवाल खड़े करता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जब विधानसभा सत्र गैरसैंण में आयोजित किया जा रहा है, तो सत्र की कार्यसूची और कार्यवाही तय करने वाली बैठकें भी वहीं क्यों नहीं हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि सभी महत्वपूर्ण संसदीय बैठकें गैरसैंण में आयोजित की जाएं, ताकि ग्रीष्मकालीन राजधानी की गरिमा का सम्मान हो सके।
यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि पंचम विधानसभा के पूरे कार्यकाल में सदन की बैठकें बहुत कम दिनों तक चली हैं। बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अंतिम सत्र को भी केवल दो दिनों तक सीमित रखने से जनसमस्याओं को सदन में उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के अवसर कम होंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की परिवर्तन रैलियों के बीच वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों को सत्र से तीन दिन पहले देहरादून बुलाने का निर्णय उनके जनआंदोलनों में शामिल होने को प्रभावित कर सकता है। आर्य ने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विधानसभा में सवाल उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सामने लाना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने विधानसभा सचिवालय से संसदीय निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा जताई।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से विधानसभा के अंतिम सत्र की अवधि बढ़ाने और कार्यमंत्रणा समिति सहित विधानमंडल दलों के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें गैरसैंण में कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को संसदीय परंपराओं और गैरसैंण की गरिमा का सम्मान करते हुए निर्णय लेना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास मजबूत हो सके।












