November 1, 2026 3:41 pm

लोक संस्कृति और विरासत के संरक्षण से ही बनी रहेगी उत्तराखंड की पहचान : CM धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति प्रदेश की पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा भी है। लोकभाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों और पर्वों के संरक्षण के साथ इन्हें भावी पीढ़ी तक पहुंचाना सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री शनिवार को रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में शामिल हुए। उन्होंने लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभा के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके जरिए प्रदेश की लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, कारीगरी और खानपान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने महोत्सव में लगाए गए पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों के स्टॉल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

विकास के साथ विरासत संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूलमंत्र के साथ प्रदेश के समग्र विकास और सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्विकास कार्यों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि युवाओं और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े। इसके लिए स्थानीय उत्पादों, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों के माध्यम से प्रदेश के उत्पादों को बेहतर बाजार और व्यापक पहचान दिलाई जा रही है। वहीं, घर में ठहरने की सुविधा वाली योजना, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों और स्थानीय मसालों की खेती को प्रोत्साहित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और साहसिक पर्यटन के माध्यम से सालभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, होटल व्यवसायियों, घर में ठहरने की सुविधा देने वालों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के साथ आयुष, स्वास्थ्य एवं आरोग्य, सूचना प्रौद्योगिकी और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों का परिणाम है कि ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प, कृषि और लघु उद्यमों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रही हैं। उन्होंने कौथिक में महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाए गए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल को महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में प्रदेश को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान मिला है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 में भी उत्तराखंड देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा और केरल के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च अंक प्राप्त किए।

उन्होंने कहा कि पलायन निवारण आयोग की सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसरों के विस्तार का संकेत है। राज्य की एकल खिड़की व्यवस्था को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान मिला है। वहीं, रसद प्रदर्शन में भी प्रदेश को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उपलब्धियां सुशासन, पारदर्शी व्यवस्था, निवेश के अनुकूल वातावरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। आधुनिकता और प्रगति के साथ लोकभाषाओं, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व देना जरूरी है।

उन्होंने विश्वास जताया कि अखिल गढ़वाल सभा सहित प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएं लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में इसी तरह योगदान देती रहेंगी। राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में प्रदेशवासियों का सहयोग और सहभागिता महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अखिल गढ़वाल सभा के पदाधिकारी, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार नरेंद्र सिंह नेगी और संगीता ढोंडियाल, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवा और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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