October 11, 2026 5:07 am

हरदा के संदेश से उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल, हाईकमान से स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की…

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में वरिष्ठ नेता हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उनके संदेश ने पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस मामले में पार्टी हाईकमान से स्थिति स्पष्ट करने और ठोस निर्णय लेने की मांग की है। वहीं, कुछ नेताओं ने चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है।

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह परिस्थितियों से जूझते हुए शून्य तक पहुंच सकते हैं, लेकिन टूट नहीं सकते। उन्होंने पार्टी को नेतृत्व से बड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी हित को प्राथमिकता दी है और नेतृत्व के प्रति आस्था बनाए रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें लगेगा कि वह पार्टी पर बोझ बन रहे हैं या उन्हें घर बैठने के लिए कहा जाएगा, तो वह बिना किसी हिचक के आदेश का पालन करेंगे।

हरीश रावत की भूमिका स्पष्ट करे हाईकमान

कांग्रेस नेता राजेंद्र शाह ने कहा कि हरीश रावत की पोस्ट के बाद हाईकमान को उनकी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। पार्टी नेतृत्व को तय करना चाहिए कि भविष्य में हरीश रावत की भूमिका क्या होगी और संगठन में उनकी जिम्मेदारी किस तरह तय की जाएगी।

वोट चोरी के मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत

कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि राहुल गांधी के निर्देशों के अनुरूप पार्टी का ध्यान वोट चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकमान को इस मामले में बनी दुविधा दूर करनी चाहिए और पार्टी के अंदरूनी विषयों पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी से बचना चाहिए।

चुनाव से पहले विवाद खत्म करने की अपील

कांग्रेस नेता नीरज त्यागी ने कहा कि हाईकमान और हरीश रावत के बीच चल रही स्थिति का जल्द समाधान होना चाहिए, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी एकजुट होकर चुनावी तैयारियों पर ध्यान दे सके। पार्टी के कुछ अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी हरीश रावत को वरिष्ठ और अनुभवी नेता बताते हुए चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर स्पष्टता की जरूरत जताई।

हरीश रावत ने क्या लिखा?

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में वर्ष 2002 और 2012 की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन दौर में भी वह पार्टी के साथ खड़े रहे और पार्टी के झंडे को ऊंचा रखने का प्रयास किया। उन्होंने लिखा कि पार्टी ने उन्हें केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसी जिम्मेदारियां दीं। उनके अनुसार, पार्टी हित सर्वोपरि होना चाहिए और जब भी उन्हें लगेगा कि वह पार्टी के लिए बोझ बन रहे हैं, तो वह पीछे हटने के लिए तैयार रहेंगे।

हरीश रावत की इस पोस्ट के बाद कांग्रेस में उनकी भूमिका और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब पार्टी कार्यकर्ताओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकमान इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है।

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