देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने के लिए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपदा के समय बेहतर समन्वय, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना हमेशा भरोसेमंद सहयोगी की भूमिका निभाती रही है। उन्होंने केदारघाटी और धराली जैसी आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में सेना और वायुसेना ने राहत एवं बचाव कार्यों में सराहनीय योगदान दिया तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय सेना की पहली प्राथमिकता मानव जीवन की रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा में गोल्डन ऑवर के दौरान राहत एवं बचाव अभियान शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
बैठक में सेना के संसाधनों और उपकरणों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर उपलब्ध कराने, जिला स्तर की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की भागीदारी बढ़ाने तथा पूर्व सैनिकों के अनुभव का उपयोग आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा की गई।
अधिकारियों ने विश्वास जताया कि सेना और यूएसडीएमए के बीच बेहतर समन्वय से भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य और अधिक तेज, प्रभावी एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित किए जा सकेंगे।











